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रामनाथ कोविन्द की जीवनी | Ram Nath Kovind Biography in Hindi

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2017 के राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवार रामनाथ कोविन्द की प्रारंभिक जीवन  और राजनैतिक करियर के बारे में बताये?

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रामनाथ कोविन्द का परिचय

राम नाथ कोविन्द का राजनैतिक सफ़र कई मोड़ से गुज़रते हुए देखा जा सकता है। इन्होने कई तरह की भूमिका में देश में भाग लिया है। वे जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। इन्होने एक समाज सेवी, एक वकील और एक राज्यसभा सांसद के तौर पर काम करते हुए कमज़ोर तबके के लोगों को हर तरह से लाभ पहुँचाने की कोशिश की। राजनीति में भी इन्होने एक अहम् भूमिका निभाई और राज्यसभा में रहते हुए कई पदों पर काम किया।

रामनाथ कोविन्द भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं। वे राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं तथा बिहार के राज्यपाल भी थे। सत्ताधारी एन डी ए द्वारा 19 जून 2017 को भारत के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित किये गए।

प्रारंभिक जीवन

राम नाथ कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला ), तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। इनके पिता का नाम स्वर्गीय मैकू लाल और माता का नाम स्वर्गीय कलावती हैं। रामनाथ कोविंद अपने पांच भाइयों, मोहन लाल कोविंद, शिवबालक, रामस्वरूप, प्यारेलाल में सबसे छोटे हैं। कोविन्द का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है।

राम नाथ कोविन्द की शुरूआती शिक्षा गांव से ही हुई। इसके बाद इन्होने कानपुर के बीएनएसडी इंटर कॉलेज से 12वीं तक की पढ़ाई की। कानपुर यूनिवर्सिटी (अब छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर) से बीकॉम अौर इसके बाद डीएवी लॉ कॉलेज से वकालत की पढाई की। इसके बाद वे दिल्ली प्रस्थान कर गए जहां जाकर इन्होने आईएएस की परीक्षा निकालने की कोशिश की, शुरु में दो बार असफलता लगने के बाद इन्होने हार नहीं मानी और तीसरी बार पुनः आईएएस एंट्रेंस की परीक्षा दी. इस बार ये सफल हुए, हालांकि इन्हें आईएएस पद नहीं मिला था। इन्होने नौकरी नहीं की और नौकरी की जगह लॉ का अभ्यास करने लगे।

रामनाथ कोविंद ने दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत की शुरुआत की। फिर दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 16 साल तक प्रैक्टिस की। 1971 में दिल्ली बार काउंसिल के लिए नामांकित हुए। दिल्ली हाईकोर्ट में 1977 से 1979 तक केंद्र सरकार के वकील रहे थे। 1980 से 1993 तक केंद्र सरकार की स्टैंडिग काउंसिल में थे। भाजपा की सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर रहे।

इनका विवाह 30 मई 1974 को सविता कोविंद के साथ हुआ था। इन दोनों के एक बेटा और एक बेटी है। बेटे का नाम प्रशांत और बेटी का नाम स्वाति है।

राजनैतिक करियर

1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर रामनाथ कोविंद प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने। इसके बाद भाजपा के संपर्क में आए और कुछ समय बाद इन्होने बीजेपी ज्वाइन कर ली। कोविंद को पार्टी ने साल 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि, उनकी हार हुई। 2007 में उन्हें प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करने के लिए भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया गया, लेकिन किस्मत ने धोखा दिया और वह फिर हार गए।

1994 में कोविंद यूपी से पहली बार राज्यसभा के लिए सांसद चुने गए। वह 12 साल तक राज्यसभा सांसद रहे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों को उठाया। वह कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। कोविंद की पहचान एक दलित चेहरे के रूप में रही है। छात्र जीवन में कोविंद ने अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं के लिए काम किया।

कोविंद आदिवासी, होम अफ़ेयर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, सामाजिक न्याय, क़ानून न्याय व्यवस्था और राज्यसभा हाउस कमेटी के चेयरमैन भी रहे। गवर्नर्स ऑफ इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के भी सदस्य रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व किया और अक्तूबर 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया।

इसके आलावा इन्होने डॉ भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट बोर्ड के सदस्य के तौर पर भी काम किया। कोल्कता के इंडियन इंस्टिट्यूट को मैनेजमेंट के मेम्बर ऑफ़ बोर्ड के पद पर भी काम किया। साथ ही इन्होने साल 2002 के अक्टूबर में यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

वह हरिद्वार में गंगा के तट पर स्थित कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए समर्पित संस्था दिव्य प्रेम सेवा मिशन के आजीवन संरक्षक भी हैं। वकील रहने के दौरान कोविंद ने गरीब दलितों के लिए मुफ़्त में क़ानूनी लड़ाई लड़ी।

रामनाथ कोविंद ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने गरीबो की भलाई के लिए अपना पुश्तैनी मकान गाँव वालों को दान कर दिया, जो अब बारातघर के रूप में प्रयोग किया जाता है। दलितों के मध्य इनकी गहरी पैठ को देखते हुए साल 2012 के उत्तरप्रदेश चुनाव में श्री राजनाथ सिंह ने उत्तरप्रदेश के दलित क्षेत्रों में पार्टी प्रचार के लिए इनकी मदद ली थी।

बिहार का राज्यपाल

कोविंद को 8 अगस्‍त 2015 को बिहार का गवर्नर नियुक्‍त किया गया। उस वक्त नीतीश कुमार ने विरोध दर्ज किया था। उनका कहना था यह नियुक्ति उनसे सलाह के बगैर की गई। राष्ट्रपति उम्मीदवार चुने जाने के बाद 20 जून 2017 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

श्री कोविन्द का नाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 19 जून 2017 को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धी राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में घोषित किया।

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