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भारत में नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) क्या है ? इसमें क्या बदलाब किया जाने की संभाबना है

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नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) में किन - किन सुधारो पर ध्यान दिया गया है ?. रोजाना काम के घंटों से लेकर आपकी सालाना छुट्टियां तक का नियम किस तरह बदल जाएंगी

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नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) में आपके काम के घंटों से लेकर आपकी सालाना छुट्टियां तक बदल जाएंगी। दरअसल, सरकार कई दशकों पुराने कानूनों में बदलाव करना चाहती है। वह इंडिया में एंप्लॉयीज की नौकरी से जुड़े कानूनों और विकसित देशों के कानूनों के बीच के फर्क को कम करना चाहती है। तेजी से बदलती दुनिया के लिए यह जरूरी है। नए कानून में सैलरी, सोशल सिक्योरिटी (पेंशन, ग्रेच्युटी), लेबर वेल्फेयर, हेल्थ, सेफ्टी और वर्किंग कंडिशंस में बदलाव होने जा रहा है। अभी कौन से नियम लागू हैं? सरकार यह भी चाहती है कि फैक्ट्रीज और सर्विस इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों के कामकाज से जुड़े नियमों में समानता हो। अभी एंप्लॉयीज के काम के घंटे और छुट्टियों (पेड/प्रिविलेज लीव) का निर्धारण Factories Act, 1948 और Shops and Establishment Act के तहत होता है। केंद्र सरकार के स्तर पर फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 लागू होता है, जबकि राज्यों के स्तर पर शॉप्स एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट लागू होता है।

खास बात यह है कि नए लेबर कोड्स सभी इंडस्ट्री पर लागू होंगे। हालांकि, राज्य सरकारों को काम के घंटों और छुट्टियों सहित कुछ प्रावधानों में बदलाव करने का अधिकार होगा। वे Shops and Establishment Act के तहत यह बदलाव कर सकेंगी। लेकिन, उन्हें ऐसा करने में केंद्र सरकार के कानूनों को भी ध्यान में रखना होगा। खासकर, काम के घंटों और छुट्टियों के मामले में। बदल जाएगी Workers की कैटेगरी  नए लेबर कोड के प्रावधान सिर्फ उन एप्लॉयीज पर लागू होंगे जो 'Workers' कैटेगरी के दायरे में आएंगे। इसमें मैनेजेरियल, एडमिनिस्ट्रेटिव और सुपरवायजरी स्टॉफ को शामिल नहीं किया गया है। उन पर आगे भी Shops and Establishment Act लागू होगा। सरकार ने वर्कर्स की परिभाषा में बदलाव किया है। इसके तहत ऐसे कंट्रिब्यूटर आएंगे, जो मैनेजेरियल, एडमिनिस्ट्रेटिव या सुपरवायजरी रोल में नहीं होंगे और जिनकी मंथली सैलरी हर महीना 18000 रुपये से ज्यादा होगी। इन्हें किसी तरह का काम दिया जा सकता है।

एक सॉफ्टवेयर डेवलेपर इसका अच्छा उदाहरण है। सॉफ्टवेयर डेवलपर तक आएगा वर्कर्स की कैटेगरी में एक सॉफ्टवेयर डेवलपर एक इंडिविजुअल कंट्रिब्यूटर है। उसका कामकाज मैनेजेरियल, एडमिनिस्ट्रेटिव और सुपरवायजरी ड्यूटी से जुड़ा नहीं होता है। उसकी (सॉफ्टवेयर डेवलपर) सैलरी सालाना 20 लाख रुपये हो सकती है। यह सॉफ्टवेयर डेवलपर नए लेबर कोड के तहत आएगा। दरअसल, नए लेबर कोड में वर्कर्स की परिभाषा बदल दी गई है। अब इसका मतलब सिर्फ फैक्ट्री वर्कर्स नहीं रह गया है। इसीलिए सॉफ्टवेयर डेवलेपर जैसी नौकरी करने वाले व्यक्ति पर भी नया लेबर कोड लागू होगा। रोजाना और साप्ताहिक काम के घंटे भी बदलेंगे नए लेबर कोड में रोजाना काम के घंटे 12 से ज्यादा नहीं हो सकते। इसी तरह एक हफ्ते में काम के कुल घंटे 48 से ज्यादा नहीं हो सकते। इससे हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम का रास्ता खुल जाएगा। इसके लिए यह माना गया है कि हफ्ते में चार दिन एक एंप्लॉयी को रोजाना 12 घंटे काम करना होगा। वर्कर्स के लिए ओवरटाइम की लिमिट भी एक तिमाही में 50 घंटे से बढ़ाकर 125 घंटे कर दी गई है। यह सभी इंडस्ट्रीज पर लागू होगा। इससे कंपनियां हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम का नियम लागू कर सकेंगी, क्योंकि जरूरत पड़ने पर वे वीकेंड में एंप्लॉयी को काम पर बुला सकेंगी।

छुट्टियों के नियम पहले आसान होंगे आपकी छुट्टियों से जुड़ा मौजूदा नियम भी बदल जाएगा।
अभी छुट्टियों का हकदार बनने के लिए एक साल में 240 दिन काम करना जरूरी है। नए लेबर कोड में इसे घटाकर 180 दिन कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अभी नए एंप्लॉयी को छुट्टी का हकदार बनने के लिए 240 दिन काम करना पड़ता है। नई व्यवस्था में वह 180 दिन काम करने के बाद ही छुट्टी लेने का हकदार हो जाएगा। साल के अंत में मिल जाएगा Leave Encashment  एंप्लॉयी के Earned Leave में बदलाव नहीं होगा। हर 20 दिन काम करने पर वह 1 दिन के EL का हकदार होगा। लीव के कैरी फॉरवर्ड के नियम में भी बदलाव नहीं होने जा रहा है। खास बात यह है कि लीव के रूल्स पहले सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर लागू होते थे। नए लेबर कोड्स में ये हर सेक्टर पर लागू होंगे। खास बात यह है कि नए लेबर कोड्स में लीव इनकैशमेंट को अनिवार्य बना दिया गया है। अगर एंप्लॉयी के पास साल के अंत में 45 दिन का लीव बचा है तो कंपनी को उसे 15 दिन के लीव का पैसा देना होगा। बाकी 30 दिन का लीव अगले कैलेंडर ईयर में कैरी-फॉरवर्ड हो जाएगा। अभी Shops and Establishment Act के तहत कंपनियां Leave Encashment तभी करती हैं जब एंप्लॉयी कंपनी छोड़ता है या रिटायर होता है। इससे प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को कैलेंडर ईयर के आखिर यानी दिसंबर की सैलरी में लीव इनकैशमेंट का पैसा अकाउंट में आ जाएगा।

WFH को मिल जाएगी मान्यता एक खास बात नए लेबर कोड की यह है कि इसमें 'Work From Home' (WFH) को मान्यता दी गई है। नए कोड के ड्राफ्ट में सर्विस इंडस्ट्री से जुड़े ऑर्डर में इसे शामिल किया गया है। हालांकि, कंपनियों को अपने स्तर पर WFH के नियम-कानून बनाने होंगे ताकि एंप्लॉयी का वर्क लाइफ बैलेंस बना रहे।

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