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वैदिक कालीन आश्रम व्यवस्था का वर्णन कीजिए। Describe the ashram system of Vedic period.

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वैदिक कालीन आश्रम व्यवस्था का वर्णन कीजिए। Describe the ashram system of Vedic period.

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वैदिक कालीन सभ्यता में सामाजिक संगठन की प्रथम इकाई परिवार था। यहाँ आर्यों ने जीवन को चार आश्रमों  1. ब्रह्मचर्य, 2. गृहस्थ, 3. वानप्रस्थ एवं 4. सन्यास आश्रमों में बाँट रखा था

  1. ब्रह्मचर्य आश्रम :- यह 6 वर्ष से 25 वर्ष के मध्य का जीवन था जिसमें बालक गुरु आश्रम में रहकर आदर्श जीवनयापन के लिये आवश्यक सभी स्तर का ज्ञान प्राप्त कर अपने व्यवहार, आचरण और संस्कार ग्रहण करता था।
  2. गृहस्थ आश्रम :- ब्रह्मचर्य आश्रम से शिक्षाग्रहण कर मनुष्य विवाह कर वंश-परम्परा को बढ़ाने हेतु 50 वर्षों तक गृहस्थ जीवन-यापन करते हुए संतान पालन, जीवन स्तर को शारीरिक श्रम से उन्नत करने में लगा रहता था। इसी काल में सामाजिक जीवन शैली में अतिथि सत्कार, अन्य वर्ग जीवों से मिलन व्यवहार व सहयोग करना सीखता था।
  3. वानप्रस्थ आश्रम :- गृहस्थ जीवन में अपने 50 वर्ष की आयु प्राप्त करते हुए मानव अपने परिवार, सगे-संबंधियों से सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर पत्नी सहित किसी एकांत क्षेत्र में रहता था। यहाँ वह विभिन्न गुरु आश्रमों में भ्रमण कर, सत्संग के द्वारा ईश्वर प्राप्ति के मार्ग को  तलाशता है।
  4. संन्यास आश्रम :- यह काल 75 वर्ष की आयु पूर्ण करने के साथ व्यक्ति पत्नी का भी त्याग कर पूर्णतः संसार से अपने आप को अलग कर कंदमूल ग्रहण करते हुए ब्रह्मचिन्तन करते हुए मोक्ष की कामना करता है।
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