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मानहानि का केस मानहानि का आरोप लगाने के कितने समय बाद तक दाखिल किया जा सकता है ?

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मानहानि का केस मानहानि का आरोप लगाने के कितने समय बाद तक दाखिल किया जा सकता है ?

 

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Maanhani का केस Maanhani का arop लगाने के तीन  महीने (90 दिन ) बाद तक दाखिल किया जा सकता है|

जब किसी व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति पर आधार हीन आरोप, आलोचना, और उसके बारे में गलत धारणा बिना किसी पुख्ता सबूत के समाज मे पेश किया जाता है। जिससे प्रभावित व्यक्ति की छवि पर समाज मे बुरा असर पड़ता है। उसकी छवि समाज मे धूमिल होती है। तब प्रभावित व्यक्ति कोर्ट में अपने खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार और अपनी छवि को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए केस फाइल करता है । तब हम उसे मानहानि कहते हैं।

आइपीसी यानी इंडियन पैनल कोर्ट के अनुसार धारा 499 धारा 500 के अनुसार मानहानि के अपराध में दोषी पाए जाने वाले अपराधी को दंडित किया जाता है ।

  • धारा 499 मानहानि
  • धारा 500 मानहानि के लिए दण्ड।
  • धारा 501 मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना।
  • धारा 502 मानहानिकारक विषय रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण सामग्री का बेचना।

आइपीसी धारा 500 - धारा 500 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे अन्य व्यक्ति की मानहानि करता है । तो उसे धारा 500 के तहत 2 साल की कैद और आर्थिक जुर्माना दिया जाता है । अपराध की गंभीरता को देखते हुए अपराधी को कैद की सजा और जुर्माना दोनों भी दी जा सकती है ।

आइपीसी धारा 501 - इस धारा के अंतर्गत जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करता है । तो उसे धारा 501 के तहत 2 साल की सजा और आर्थिक जुर्माना द्वारा दंडित किया जाता है। या फिर जुर्माना और सजा दोनों दी जाती है।

आइपीसी धारा 502 - धारा के अंतर्गत जब कोई व्यक्ति किसी को आर्थिक उद्देश्य से किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करता है । तो उसे धारा 502 के तहत 2 साल कैद की सजा या जुर्माना या सजा और जुर्माना दोनों दंड प्रदान किए जाते हैं ।

आइपीसी धारा 505 - इस धारा के अंतर्गत किसी खबर, रिपोर्ट को इस तरह से पेश करना जिससे भारतीय जल , स्थल , वायु सेना का कोई भी सैनिक और अधिकारी विद्रोह या बगावत करने के लिए तैयार हो जाए । इसके साथ ही कोई भी ऐसी भ्रामक जानकारी जिससे समाज या समुदाय में डर और भय का माहौल उत्पन्न हो जाये । और लोग सरकार के खिलाफ हो जाये । इस दौरान आरोपित व्यक्ति को धारा 505 अंतर्गत 2 साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों सजाएं दी जा सकती है।

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