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गंगा के जल को पवित्र क्यों मना जाता है? Ganga jal ko pavitra kyu mana jata hai.

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गंगा के जल को पवित्र क्यों मना जाता है? Ganga jal ko pavitra kyu mana jata hai.

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गंगा नदी विश्व भर में अपनी शुद्धीकरण क्षमता के कारण जानी जाती है।  गंगा, भारत और बांग्लादेश में मिलकर 2,510 किलोमीटर की दूरी तय करती है. यह सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है. हिंदू धर्म में गंगा जल और गाय को सबसे पवित्र माना गया है यहाँतक की हिंदू धर्म में गंगाजल को अमृत की उपाधी दी गई है। जन्म से मरण तक हर पूजनीय कर्म में गंगाजल का उपोयग आवश्यक माना गया है। मानना है की गंगा जल में नहाने मात्र से बहुत सरे बीमारी ठीक हो जाते है, मान्यता है कि मृत्यु से पहले यदि किसी मरणासन्न व्यक्ति के मुंह में तुलसी के पत्तों के साथ गंगाजल डाला जाए तो वह स्वर्ग को जाता है।

हिमालय की गोद गंगोत्री से निकलने वाली गंगा ( भागीरथी), हरिद्वार में अलकनंदा से मिलती है। इस सफर में गंगा के जल में कुछ खास लवण और जड़ीबूटियां घुल जाती हैं। जिससे गंगा जल अन्य पानी के मुकाबले कहीं ज्यादा शुद्ध और औषधीय गुणों से परिपूर्ण हो जाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस नदी के जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। नदी के जल में प्राणवायु (ऑक्सीजन) की मात्रा को बनाये रखने की असाधारण क्षमता है, किन्तु इसका कारण अभी तक अज्ञात है।

गंगाजल में बैट्रिया फोस नामक बैक्टीरिया पाया जाता है। यह पानी के अंदर रसायनिक क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले अवांछनीय पदार्थों को खाता रहता है। इससे जल की शुद्धता बनी रहती है। गंगा के पानी में गंधक की प्रचुर मात्रा में है, इसलिए यह खराब नहीं होता है। इसके अतिरिक्त कुछ भू-रासायनिक क्रियाएं भी गंगाजल में होती रहती हैं. जिससे इसमें कभी कीड़े पैदा नहीं होते।

यही कारण है कि गंगा के पानी को बेहद पवित्र माना जाता है। जैसे-जैस गंगा हरिद्वार के आगे अन्य शहरों की ओर बढ़ती जाती है। शहरी गंदगी मिलने के कारण प्रदूषित होना शुरू हो जाती है।

वैज्ञानिकों का मत- इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी के अनेक वैज्ञानिकों ने गंगा जल का परीक्षण किया और पाया गंगाजल सबसे विलक्षण है। इंग्लैंड के मशहूर चिकित्सक सी.ई. नेल्सन ने गंगाजल पर अन्वेषण करते हुए लिखा है कि इस पानी में कीटाणु नहीं होते। उसके बाद महर्षि चरक को उद्धत करते हुए उन्होंने लिखा है कि गंगाजल सही मायने में पीने योग्य है।  वैज्ञानिक परीक्षणों से पता चला है कि गंगाजल से स्नान करने तथा गंगाजल को पीने से हैजा, प्लेग, मलेरिया तथा क्षय आदि रोगों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। इस बात की पुष्टि के लिए एक बार डॉ. हैकिन्स, ब्रिटिश सरकार की ओर से गंगाजल से दूर होने वाले रोगों के परीक्षण के लिए आए थे। उन्होंने गंगाजल के परिक्षण के लिए गंगाजल में हैजे (कालरा) के कीटाणु डाले गए। हैजे के कीटाणु मात्र 6 घंटें में ही मर गए और जब उन कीटाणुओं को साधारण पानी में रखा गया तो वह जीवित होकर अपने असंख्य में बढ़ गया।

गंगा हिमालय से यमुना, घाघरा, गंडक और कोसी नदियों जैसे कई नदियों से जुड़ती है. यमुना नदी यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है, लेकिन इलाहाबाद में गंगा नदी में शामिल हो जाती है. प्रायद्वीपीय उपनगरों से आने वाली मुख्य सहायक नदियां चंबल, बेतवा और सोन हैं.

गंगोत्री हिमनद उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है, जहां से भागीरथी नदी निकलती है और देवप्रयाग में अलकनंदा से मिल जाती है. इस संगम के बाद गंगा का निर्माण होता है. यहां से गंगा नदी बहती है और बंगाल की खाड़ी में शामिल हो जाती है.

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