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आकाश में महल - Akash me mahal

आकाश में महल
| गोनू झा की कहानी |
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राजा को बुद्धिमान दरबारी नियुक्त करना था। अतः राज में ढिंढोरा पिटवा दिया गया।

निर्धारित तिथि को भारी संख्या में प्रत्याशी पहुँचे। राजा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा, 'प्रिय जनो, मुझे एक हवाई महल बनवाना है। इसके लिए जो अपने को उपयुक्त समझता हो, हाथ उठावे।

गोनू झा को छोड़कर किसी ने हाथ नहीं उठाया। राजा ने चौंकते हुए गोनू झा की ओर देखा, क्या आप यह काम कर सकते हैं? गोनू झा ने हामी भरी तो राजा विस्मित। उसने कहा, 'अगर नहीं कर सकेंगे तो साल-भर के लिए देशनिकाला मंजूर है?

गोनू झा ने विश्वासपूर्वक कहा, बिल्कुल मंजूर है महाराज! करने से क्या नहीं होता? आत्मविश्वासी और कर्मठ के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता, इसलिए अभी ही चुनौती को कैसे अस्वीकार कर दूँ?

राजा ने फिर पूछा, 'आप यह काम कितने दिनों में पूरा कर सकते हैं? गोनू झा ने प्रसन्नतापूर्वक कहा, 'महाराज, काम में हाथ लगाने के लिए मुझे चार महीने का समय चाहिए और ईंट-गारा आपको ही भिजवाना होगा।

राजा मान गया।

निश्चित तिथि को प्रजा आश्चर्यजनक नजारा देखने के लिए उपस्थित हो गई। ऊपर से आवाज आने लगी, 'ईंट लाओ, गारा लाओ, महल बनाओ। समय बीतता जा रहा है।

सभी ने उत्सुकता से ऊपर देखा। ऊपर दिखाई कुछ नहीं दे रहा था, किंतु आवाज आती ही रही। गोनू झा ने राजा से कहा, 'महाराज, ईंट-गारा भिजवाइए; अन्यथा राज बिना काम के ही मजदूरी ले जाएँगे।

राजा अवाक! आकाश में ईंट-गारा भेजे तो कैसे? राजा समझ गया कि यह गोनू झा की बुद्धिमत्ता है। अंततः हार स्वीकारते हुए कहा, 'गोनू झा, मैंने आपको बहाल किया, किंतु यह बताइए कि आवाज कहाँ से आ रही है?

लोग अचंभित थे कि जरूर यह कोई पहुँचा हुआ तांत्रिक है, परंतु वेशभूषा से सामान्य गृहस्थ दिखता है।

दरबारीगण कहने लगे, 'इसमें कर्मठता का प्रश्न कहाँ उठता है! यह तो तंत्र-मंत्र से ऎसा कर रहे हैं।' किसी ने संदेह पर पक्की मुहर लगाते हुए कहा, 'हाँ-हाँ, यह तो वन में जीव-जंतुओं पर जादू-टॊना और पंछियों से वार्तालाप करते रहते हैं। मैंने चुपके से ऎसा करते हुए देखा भी है।'

जितने मुँह, उतनी बातें! 'अँधेरा घर, साँप ही साँप! लोकोक्ति चरितार्थ हो रही थी।

गोनू झा ने गंभीर मुद्रा में रहस्य पर से परदा उठाते हुए कहा, ',महाराज, मैं जादूगर नहीं हूँ; इस बीच मैंने तोतों और पहाड़ी मैनाओ को पाला। उन्हें बड़े यत्न से यह बोलने का प्रशिक्षण दिया। उसी का फल अब मिल रहा है।'

गोनू झा की अद्भुत बुद्धि और धैर्य से खुश होकर राजा ने उन्हें खास दरबारी नियुक्त कर लिया।

 

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